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स्वार्थी का मतलब होता है स्वयं के अर्थ को जानने वाला अर्थात आप अपने अर्थ को पहचानो .....?
बिना अर्थ के तों लाइट अर्थात बिजली भी नहीं चलती ।
आपको जो मिला है वो भी फेस है और आप भी फेस है
दोनों फेश होने पर क्या होता है
बल्ब जलता नहीं फ्यूज हो जाता है या धमाका होता है
आपके पास अर्थ होना चाहिए ना की फेस
क्योंकि फेस तो आप स्वयं है।।
जिनका तुम क्या ख्याल रखते हो ना,
गौर करें वो आप का ध्यान रखते हैं क्या ,
....... नहीं........ तों फिर आप क्यों
जिनका तुम क्या ख्याल रखते हो.
वो इतना संभल गए हैं
अपना ही नहीं ....... वो अब
अपनों का ख्याल रखते हैं ।।
जिन्होंने तुम्हारी तेल मालिश की है ना..
तुम उनकी करो सुधर जाओगे संभल जाओगे ।।
हम परेशान क्यों हैं...?
जो हमारा ख्याल रखते हैं हम उनका नहीं रखते हैं ।
हिसाब सबको देना पड़ता है
और देना भी चाहिए
नहीं तो आप अभी कम और अभी और होंगे ....? (क्या परेशान)
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