यज्ञ की रक्षा करें जो सदा और काशी के कोतवाल कहाते ।
भक्तों की कामना पूर्ण करें माता वैष्णों के घाम की शोभा बढ़ाते ॥
कष्ट अमंगल दूर करें, कर जोरि के आज हम शीश नवाते ।
हे अष्ट भैरव सुनो विनती हो के आतुर भक्त तुम्हारे बुलाते ॥
सप्त धृति मांत्रिका
: सातहुं विन्दु पे सातहुं माता श्री लक्ष्मी धृति मेधा जी भी आओ ।
स्वाहा सुप्रभा सरस्वती मातु हमें भव सिंधु से पार लगाओ
है वसुधारा सदा वसुधा तल पे करुणामयि धार बहाओ । पूजा में आय सनाथ करो माँ भक्त के माथे माँ हाथ लगाओ।
*चतुःषष्ठि योगिनी*
ज्ञान की दायिनी बुद्धि प्रदायिनी,
दूर करो मन का अंधियारा ।
मूढ़ हूँ मैं असहाय हूँ मैं
जननी ममता का माँ दे दो सहारा ।।
मातु कृपा करि कष्ट हरो अपराध बिसार के आज हमारा ।
देवी तुम्हारी करूँ विनती शरणागत है यह पुत्र तुम्हारा ।।
: * गंगाजी का ध्यान*
हे भय हारिरीण हे भवतारिणि शोक विनाशिनी पावनि गंगा ।
शंभुजटा में विराज रही शुभदायिनी मोक्ष प्रदायिनी गंगा ॥
भागीरथी जननी जन की शुचि अमृत धार प्रवाहिनि गंगा ।
कष्ट हरो दुःख दूर करो शुभ दायिनि हे वर दायिनि गंगा ॥
: जय गणनायक सिद्धि विनायक मंगलदायक मोक्ष प्रदाता ।
हो तुम ही सबके शुभदायक कष्ट हरो हे भाग्य विधाता ।।
ऋद्धि औ सिद्धिके स्वामी तुम्हीं हो पिता शुभ-लाभ केहो भवदाता ।
छोड़ि के गोदि माँ गौरी की आओ तुम्हे आज भक्त तुम्हारा बुलाता ।।
वन्दहु शम्भु भवानी के नन्दन आनन्द कन्द निकन्द पति जै ।
दीनन दायक ऋद्धि वा सिद्धि के हे गणनायक मो पे पसीझें ॥
बुद्धि के दाता गजानन आनन मोरी कुबुद्धि सुबुद्धि कीजै ।
मूषक वाहन छाड़ि विनायक पूजा में आयके आसन लीजै ।।
: * पवनपुत्र हनुमान जी *
जय रघुनन्दन है सत वन्दन भाल पे चन्दन की छवि न्यारी ।
सिय के कन्त प्रभू हनुमन्त कृपा करि के सुधि लीजै हमारी ।।
भक्तों की कामना पूर्ण करें जो आज हमारी भी आयी है बारी ।
राम का नाम जपें जो सदा कट जाते हैं संकट भारी से भारी ||
: वरुण देव जी का ध्यान*
वास करहिं मुख में लक्ष्मीपति कण्ठ में वास करें त्रिपुरारी ।
मूल में ब्रह्मा निवास करें मध्य में माताएं मंगलकारी ।।
सागर द्वीप नदी वसुधा सब तीरथ वेद भी है शुभकारी ।
हे वरुण देव विराजो यहाँ दुःख दूर करो विनती है हमारी ॥
*शिव जी ध्यानम्*
शीश पे गंगा हे कण्ठ भुजंगा हे कोटि अनंग लजावन वाले ।
हाथ त्रिशूल हे नाशक शूल वही डमरू के बजावन वाले ।।
मृगछाल सुशोभित है कटि पे और भक्त की लाज बचावन वाले
शंकर की महिमा है अपार ये दानी बड़े हे बड़े भोले भाले ॥
नवग्रह ध्यानम्*
सूर्य हरें तम कष्ट करें कम चन्द्र बड़े मुद मंगलकारी ।
बुद्धि पवित्र करे बुध नित्य बढ़ावत ज्ञान गुरु सुखकारी ।।
शुचि जीवन शुक्र सदैव करे शनि शोक हरें रवि दृष्टि निहारी ।
राहु रहें गति केतु करें मति दिव्य नवग्रह सोहत भारी ।।











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