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सोमवार, 26 मार्च 2018

Yogeshavr vachan / amrit vachan / anmolvachan /sl

धूल भी पैरों से रौंदी जाने पर ऊपर उठती है, तब जो मनुष्य अपमान को सहकर भी स्वस्थ रहे, उससे तो वह पैरों की धूल ही अच्छी।– माघकाव्य
 
 इतिहास इस बात का साक्षी है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित नहीं किया जाता। समाज तो उसी का सम्मान करता है, जिससे उसे कुछ प्राप्त होता है।
 
अपमानपूर्वक अमृत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान |
 
अपमान और दवा की गोलियां निगल जाने के लिए होती हैं, मुंह में रखकर चूसते रहने के लिए नहीं।
 
गाली सह लेने के असली मायने है गाली देनेवाले के वश में न होना, गाली देनेवाले को असफल बना देना। यह नहीं कि जैसा वह कहे, वैसा कहना।
 
 मान सहित विष खाय के , शम्भु भये जगदीश ।बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो शीश ॥



                       



शब्द मुफ्त में मिलते हैंआप जैसा उपयोग करेंगेवैसी कीमत चुकानी पड़ेगी

  बिना कारण कलह कर बैठना मूर्ख का लक्षण हैं। इसलिए बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी हानि
 सह ले लेकिन विवाद न करे ।


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