धूल भी पैरों से रौंदी जाने पर ऊपर उठती है, तब जो मनुष्य अपमान को सहकर भी स्वस्थ रहे, उससे तो वह पैरों की धूल ही अच्छी।– माघकाव्य
इतिहास इस बात का साक्षी है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित नहीं किया जाता। समाज तो उसी का सम्मान करता है, जिससे उसे कुछ प्राप्त होता है।
अपमानपूर्वक अमृत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान |
अपमान और दवा की गोलियां निगल जाने के लिए होती हैं, मुंह में रखकर चूसते रहने के लिए नहीं।
गाली सह लेने के असली मायने है गाली देनेवाले के वश में न होना, गाली देनेवाले को असफल बना देना। यह नहीं कि जैसा वह कहे, वैसा कहना।
मान सहित विष खाय के , शम्भु भये जगदीश ।बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो शीश ॥
शब्द मुफ्त में मिलते हैंआप जैसा उपयोग करेंगेवैसी कीमत चुकानी पड़ेगी
बिना कारण कलह कर बैठना मूर्ख का लक्षण हैं। इसलिए बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी हानि
सह ले लेकिन विवाद न करे ।
ये आध्यात्मिक विचार आपको कैसे लगे हमें
कमेंट करके जरूर बताइये और यह विचार आप अपने सगे सम्बन्धियों और मित्रों के साथ भी
जरूर शेयर कीजिये| yogeshvar vachan से जुड़े रहिये और नयी जानकारियां अपने ईमेल पर प्राप्त करने के
लिए हमें सब्स्क्राइब करें..Subscribe करने के लिए यहाँ क्लिक करें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें